मैं भोजपुरी चैनल में एंकर हूँ, मुझे भोजपुरी तो नहीं आती लेकिन मालिक बहुत मानते हैं!
भोजपुरी भाषा -संस्कृति का तमाशा बनाने वालों के गाल पर जोरदार तमाचा मारती मनोज भावुक की तीन कविताएं… मनोज भावुक रूप-श्रृंगार और जीवन-दर्शन की बात करने वाले महज़ भावुक ग़ज़लकार ही नहीं, वरन समाज की विसंगतियों, विद्रूपताओं और भाषा-संस्कृति पर हो रहे अत्याचार पर तिलमिलाकर आग का राग भी सुनाने का काम करते हैं। पेश हैं भोजपुरी को हेय दृष्टि से देखने वालों और भोजपुरी भाषा-संस्कृति का तमाशा बनाने वालों के गाल पर जोरदार तमाचा रसीद करती मनोज भावुक की तीन कविताएँ… 1- मालिक बहुत मानते हैं =============== मै भोजपुरी चैनल में एंकर हूँ। तुम्हें भोजपुरी आती है ? नहीं… पर मालिक बहुत मानते हैं। मै राग-रंग की एंकर हूँ। तुम्हें गीत-संगीत का ज्ञान है ? बिलकुल नहीं.. पर मालिक बहुत मानते हैं। मै असमियां हूँ, एक भोजपुरी चैनल की हेड… तब तो तुम्हें सिर्फ दिखाई देता होगा, सुनाई तो नहीं। हाँ, भोजपुरी का इक दीवाना कहता भी है कि ‘स्क्रीन पर भोजपुरी भाषा का बलात्कार होता है” पर मुझे फर्क नहीं पड़ता। क्योंकि, मालिक बहुत मानते हैं। मुझे और भी तो बहुत कुछ आता है तभी तो मालिक बहुत मानते हैं। क्या इसीलिए तुम्हें भोज...