इंतक़ाम (भोजपुरी ) फिल्म समीक्षा
इंतक़ाम (भोजपुरी ) फिल्म समीक्षा
निर्देशक -रवि सिन्हा
निर्मात्री - रेखा सिन्हा
बैनर - आदि शक्ति एंटरटेनमेंट , विजय लक्ष्मी इंटनेशनल
कलाकार- खेसारी लाल यादव , विराज भट्ट , अवधेश मिश्र , काजल रघनी , पूनम दुबे , सीमा सिंह
कहानी - फिल्म की कहनी की शुरुआत आफ़ताब के जेल से होती है। आफ़ताब अपने बीती बातों को बताता है।
विजय और आफ़ताब दोनों भाई है और दोनों कॉलेज में पढाई करते हैं। वंहा उनकी मुलाकात स्वेता (काजल) और नेहा (पूनम) से होती है दोनों के दोनों प्यार में पढ़ जातें है। स्वेता के पिता और क्षेत्र के विधायक भानु प्रताप (अवधेश) आफ़ताब को उसकी माँ की अस्लिल विडिओ िदखा कर उसके साथ काम कर्मणे ले लिया मजबूर करता है। विजय एक पुलिस इंस्पेक्टर बन जाता है और आफ़ताब अब्बू के नाम से गलत कामों का अंजाम देता है। विजय को पता चलता है की आफ़ताब ही अब्बू है तो वह गिरफ्तार करने के जाता है और दोनों में टकराव होती है। अब्बू अपना इंतक़ाम पूरा करने के लिए विजय के हाथ से निकल जाता है और अपना इंतक़ाम पूरा कर अपने आप कानून के हवाले कर देता है।
टिप्पणी - फिल्म की कहानी कोई नहीं है। विराज को एक्शन देखना को मिला। दोनों हेरोइनो को कुछ खास मौका नहीं मिला अपना एक्टिंग दिखने के लिए। सीमा सिंह का आइटम कुछ हद ठीक है।
अंक - 10 / 6
दिलशाद शाह
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