भोजपुरी खलनायको की अनूठी पहल ,

भोजपुरी खलनायको की अनूठी पहल , दिखाई एकजुटता


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भोजपुरी फ़िल्म जगत अपने बिखराव के लिए जाना जाता है । फ़िल्म जगत से जुड़े लोगो का मानना है की यहां जितने बड़े कलाकार है उतने गुट हैं । यही बात भोजपुरी के खलनायको पर भी लागू होती है यहाँ भी गुटबाजी की बातें चलती रहती है लेकिन खलनायको ने इस धारणा को गलत साबित करते हुए यह सन्देश देने की सफल कोशिस की है की खलनायको में आपस में परदे पर भले ही मतभेद हो लेकिन रियल लाइफ में उनके बीच कोई मनभेद नहीं है । उल्लेखनीय है की भोजपुरी में छोटे बड़े नये पुराने लगभग 50 खलनायक हैं । खलनायक संजय पांडे ने सबको एक मंच पर लाने के उद्देश्य से व्हाट्सएप्प पर विलेन नाम से एक ग्रुप बनाकर उसमे सभी खलनायको को जगह दिया । शुरुवात में खलनायको का ग्रुप छोड़ने का सिलसिला जारी रहा लेकिन बाद में इनमे एकजुटता आनी शुरू हो गयी और लोग रोजाना अपना सुख दुःख शेयर करने लगे । कॉमेडियन से खलनायक बने मनोज टाइगर व खलनायक अवधेश मिश्रा ने एक प्रस्ताव रखा की व्हाट्सएप्प से निकल कर ग्रुप के लोग एक गेट टू गेदर रखे ताकि एक दूसरे के और करीब आने का उन्हें मौक़ा मिला । आखिरकार 23 अप्रैल को कुछेक खलनायको को छोड़ सारे खलनायक एक भव्य हॉल में इकट्ठे हुए । इसमें भोजपुरी के शुरुवाती दौर के बाद के सबसे पुराने खलनायक ब्रजेश त्रिपाठी , राम मिश्रा से लेकर आज के दौर के सबसे नए खलनायक बबलू खान , संतोष पहलवान और असगर खान तक शामिल हुए । भोजपुरी फिल्मो के तीसरे चरण के पहले खलनायक सुशील सिंह, प्रकाश जैस, अवधेश मिश्रा , संजय पांडे , मनोज टाइगर ,गिरीश शर्मा , अनिल यादव, अयाज़ खान , सूर्या द्वेवेदी , विष्णु शंकर बेलू , बिपिन सिंह, जय सिंह , राजन मोदी , समर्थ चतुर्वेदी , विनोद मिश्रा , देव सिंह ,सुवोध सेठ ,करण पांडे , सोम भूषण , हीरा यादव , नीरज यादव , प्रेम दुबे , सी पी भट्ट, अखिल तिवारी, धर्मेन्द्र सिंह भी शामिल हुए । कुछ खलनायक शहर से बाहर होने के कारण इसमें शामिल नहीं हो पाये । उल्लेखनीय है की खलनायको के इस मिलन समारोह में सिर्फ खलनायको को ही आने की अनुमति थी लेकिन बाद में हर समारोह में एक अतिथि को आमंत्रित करने की बात हुई और इस समारोह में पी आर ओ उदय भगत को आमंत्रित किया गया । खुशनुमा माहौल में देर रात तक चले इस समारोह अपने आप में अनूठा बन गया क्योंकि परदे पर बात बात पर एक दूसरे के खून के प्यासे नज़र आने वाले खलनायक लगातार एक दूसरे से गले मिलते रहे और हिंदी भोजपुरी गाने पर झूमते रहे ।फ़िल्म जगत की संभवतः यह पहली पार्टी थी जहां कोई भी अभिनेत्री नहीं थी । ड्रेस कोड अनिवार्य होने के कारण सभी एक जैसे कपड़ो में नज़र आये । समारोह की सबसे बड़ी बात यह रही की किसी भी बात को कोई आपस में नहीं उलझे और सर्व सम्मति से हर साल 23 अप्रैल को भोजपुरी विलेन डे मनाने का फैसला किया । इसके अलावा समय समय पर ऐसे ही आयोजन की बात कही । बहरहाल , भोजपुरी के खलनायको ने एक जुटता दिखाकर फ़िल्म जगत के कलाकारों व तकनीशियनों को एक अच्छा सन्देश दिया है और निसंदेह अब अन्य लोग भी इस पर अमल करना शुरू करेंगे ।

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